18/03/2012
चला मैं जब भी एक कदम तेरी तरफ,
जाने ये फ़ासला कैसे और बढ़ गया,
मैं तो साथ ही चलता रहा तेरे,
जाने कैसे फिर तू आगे निकल गया,
तुम तो मेरे हर ख़्वाबों में बसते थे,
तुम तो हर पल मेरी बाहों में रहते थे,
क्या वजह है जो अब तुम करीब नहीं आते,
अब क्यों दर्द बनकर मेरी आँखों से बहते हो,
शाम हो तन्हाई की, या फिर रात हो सिसकियों की,
हर पल हाथ उठा कर तुझे ही माँगा मैंने,
ग़म ने कर लिया है कैद मुझे इस अँधेरे में,
पर तुम तो रोशनी के लिए मेरा दिल जलाए बैठे हो,
होंठो पर तेरे रहे हम हमेशा सांस की तरह,
मचलते रहे हम तेरे दिल में जज़्बात की तरह,
एक पल भी गंवारा नहीं होता तुम्हे देखे बगैर,
पर जाने तुम किस दुनिया में अपना दिल लगाये बैठे हो,
उसे तुम्हारी दुनिया छोड़ गए हुए ज़माने पर,
एक तुम हो के अब भी आस लगाए बैठे हो.